बद्रीनाथ — उत्तर
उत्तराखंड, अलकनंदा के तट पर। भगवान विष्णु का धाम।
“तीर्थ” का अर्थ है — घाट, वह स्थान जहाँ से पार उतरा जाए। भारत की भूमि ऐसे सहस्रों तीर्थों से भरी है, जिन्होंने सहस्रों वर्षों से इस देश को एक सूत्र में बाँधे रखा है।
शिव पुराण के अनुसार ये वे बारह स्थान हैं जहाँ भगवान शिव ज्योति-स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। ध्यान देने योग्य बात यह है कि ये पूरे भारत में फैले हैं — जो इस भूमि की सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रमाण है।
| क्रम | ज्योतिर्लिंग | स्थान |
|---|---|---|
| 1 | सोमनाथ | वेरावल, गुजरात |
| 2 | मल्लिकार्जुन | श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश |
| 3 | महाकालेश्वर | उज्जैन, मध्य प्रदेश |
| 4 | ओंकारेश्वर | खंडवा, मध्य प्रदेश |
| 5 | केदारनाथ | रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड |
| 6 | भीमाशंकर | पुणे, महाराष्ट्र |
| 7 | काशी विश्वनाथ | वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| 8 | त्र्यंबकेश्वर | नासिक, महाराष्ट्र |
| 9 | वैद्यनाथ | देवघर, झारखंड |
| 10 | नागेश्वर | द्वारका, गुजरात |
| 11 | रामेश्वरम् | रामनाथपुरम, तमिलनाडु |
| 12 | घृष्णेश्वर | औरंगाबाद, महाराष्ट्र |
भारत की चार दिशाओं में स्थित चार महातीर्थ, जिनकी यात्रा जीवन में एक बार करने की परम्परा है।
उत्तराखंड, अलकनंदा के तट पर। भगवान विष्णु का धाम।
तमिलनाडु। यह ज्योतिर्लिंग भी है और धाम भी।
ओडिशा। विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा का स्थल।
गुजरात। श्रीकृष्ण की नगरी।
यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — हिमालय की गोद में स्थित यह यात्रा सामान्यतः अक्षय तृतीया से आरम्भ होकर दीपावली के आसपास कपाट बंद होने तक चलती है।
पौराणिक कथा के अनुसार जब सती ने देह त्याग किया और शिव उनका शरीर लेकर घूमने लगे, तब विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उस देह के अंग पृथक किए। जहाँ-जहाँ वे अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। परम्परा में 51 शक्तिपीठ सर्वाधिक प्रचलित हैं।
सप्त पुरी अर्थात् सात मोक्षदायिनी नगरियाँ — अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार (माया), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जैन) और द्वारका।
कुम्भ मेला चार स्थानों पर लगता है — प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। यह विश्व का सबसे बड़ा मानव समागम माना जाता है, जिसे यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है।
हिमालयी तीर्थों के कपाट मौसम के अनुसार खुलते और बंद होते हैं, तथा अनेक स्थानों पर पंजीकरण अनिवार्य है। यात्रा से पहले संबंधित मंदिर समिति अथवा राज्य पर्यटन विभाग की आधिकारिक सूचना अवश्य देखें।
ज्योतिर्लिंग बारह हैं। शिव पुराण के अनुसार ये वे स्थान हैं जहाँ भगवान शिव ज्योति के स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। ये गुजरात से लेकर तमिलनाडु और उत्तराखंड से झारखंड तक पूरे भारत में फैले हैं।
चार धाम भारत की चार दिशाओं में हैं — उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम्, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका। इन्हें आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है। छोटा चार धाम उत्तराखंड में स्थित चार तीर्थ हैं — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ।
परम्परा में 51 शक्तिपीठ सर्वाधिक प्रचलित हैं, यद्यपि कुछ ग्रंथों में 108 का उल्लेख भी मिलता है। मान्यता है कि सती के देह-अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। ये भारत के अतिरिक्त नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका तक फैले हैं।
कुम्भ मेला चार स्थानों पर लगता है — प्रयागराज (गंगा-यमुना-सरस्वती संगम), हरिद्वार (गंगा), उज्जैन (क्षिप्रा) और नासिक-त्र्यंबकेश्वर (गोदावरी)। प्रत्येक स्थान पर बारह वर्ष के चक्र में कुम्भ आता है। यह विश्व का सबसे बड़ा मानव समागम माना जाता है और यूनेस्को ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में सम्मिलित किया है।