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हिंदू पर्व एवं त्योहार

सनातन का हर पर्व केवल उत्सव नहीं — वह ऋतु, कृषि, खगोल और स्मृति का संगम है। यहाँ वर्षभर के प्रमुख पर्वों का क्रम, महत्व और तिथि दी गई है।

तिथि के विषय में

नीचे दी गई तिथियाँ हिंदू पंचांग के अनुसार हैं। चूँकि पंचांग चंद्र-सौर गणना पर आधारित है, अंग्रेजी कैलेंडर में तिथि हर वर्ष बदलती है। अपने नगर की सटीक तिथि एवं मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

वर्षभर के प्रमुख पर्व

पौष–माघ (14/15 जनवरी)
मकर संक्रांति
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व। उत्तरायण का आरम्भ। दान, तिल-गुड़ और स्नान का विशेष महत्व। पोंगल, बिहू, लोहड़ी और उत्तरायण इसी के क्षेत्रीय रूप हैं।
माघ शुक्ल पंचमी
वसंत पंचमी
माँ सरस्वती की उपासना का दिन। विद्या-आरम्भ एवं अक्षर-लेखन के लिए शुभ। पीले वस्त्र और पीले पुष्प का प्रचलन।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
महाशिवरात्रि
भगवान शिव की महारात्रि। रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक और उपवास। मान्यता है कि इसी रात शिव-पार्वती का विवाह हुआ तथा शिव ने तांडव किया।
फाल्गुन पूर्णिमा
होली
बुराई पर अच्छाई की विजय। होलिका दहन प्रह्लाद की भक्ति की स्मृति है, और अगले दिन रंगों की होली वसंत के स्वागत का उत्सव। ब्रज की लट्ठमार होली विश्वप्रसिद्ध है।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
चैत्र नवरात्रि एवं गुड़ी पड़वा
हिंदू नववर्ष का आरम्भ। नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र-कर्नाटक में उगादि।
चैत्र शुक्ल नवमी
राम नवमी
भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव। अयोध्या सहित देशभर में शोभायात्रा, रामकथा और रामचरितमानस का पाठ।
चैत्र पूर्णिमा
हनुमान जयंती
हनुमान जी का जन्मोत्सव। सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का पाठ। कुछ क्षेत्रों में यह कार्तिक में मनाई जाती है।
वैशाख शुक्ल तृतीया
अक्षय तृतीया
अबूझ मुहूर्त — इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल देता है। नए कार्य, विवाह और दान के लिए शुभ।
आषाढ़ पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा
व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास एवं समस्त गुरुओं के प्रति कृतज्ञता का पर्व। गुरु-शिष्य परम्परा का उत्सव।
श्रावण पूर्णिमा
रक्षाबंधन
भाई-बहन के स्नेह एवं रक्षा के वचन का पर्व। बहन राखी बाँधती है, भाई रक्षा का वचन देता है।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
जन्माष्टमी
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव। मध्यरात्रि में जन्म-उत्सव, झाँकी, दही-हांडी और उपवास। मथुरा एवं वृंदावन में विशेष आयोजन।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
गणेश चतुर्थी
विघ्नहर्ता गणेश का जन्मोत्सव। दस दिन की स्थापना के बाद विसर्जन। महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव लोकमान्य तिलक द्वारा जनजागरण का माध्यम बना।
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी
शारदीय नवरात्रि
माँ दुर्गा के नौ रूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री की उपासना। गुजरात का गरबा और बंगाल की दुर्गा पूजा इसी काल में।
आश्विन शुक्ल दशमी
दशहरा / विजयादशमी
श्रीराम की रावण पर विजय तथा माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय। रावण दहन एवं शस्त्र पूजा। नए कार्य आरम्भ करने के लिए अत्यंत शुभ।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
करवा चौथ
सुहागिन स्त्रियों का निर्जला व्रत। चंद्रदर्शन के बाद व्रत का पारण।
कार्तिक अमावस्या
दीपावली
सनातन का सबसे बड़ा पर्व। श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति। लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीपदान। पाँच दिन — धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
कार्तिक शुक्ल षष्ठी
छठ पूजा
सूर्य देव एवं छठी मैया की उपासना। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल का महापर्व। छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत और अर्घ्य।
कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली
काशी के घाटों पर लाखों दीप। गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व। गुरु नानक जयंती भी इसी दिन।

नियमित व्रत एवं तिथियाँ

व्रतविवरण
एकादशीप्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि — मास में दो बार। भगवान विष्णु को समर्पित।
प्रदोष व्रतप्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी — शिव उपासना, प्रदोष काल में पूजन।
पूर्णिमापूर्ण चंद्र की तिथि — सत्यनारायण कथा एवं दान।
अमावस्यापितरों के तर्पण एवं श्राद्ध की तिथि।
संकष्टी चतुर्थीकृष्ण पक्ष की चतुर्थी — गणेश उपासना, चंद्रदर्शन के बाद पारण।
मंगलवार एवं शनिवारक्रमशः हनुमान जी एवं शनिदेव की उपासना के दिन।

पर्वों के पीछे का विज्ञान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू त्योहारों की तिथि हर वर्ष क्यों बदलती है?

हिंदू पंचांग चंद्र-सौर (luni-solar) है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर पूर्णतः सौर है। चंद्र मास लगभग 29.5 दिन का होता है, इसलिए तिथियाँ ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर वर्ष खिसकती रहती हैं। इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन वर्ष में एक अधिक मास जोड़ा जाता है।

नवरात्रि वर्ष में कितनी बार आती है?

वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं — चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ। इनमें चैत्र (वासंतिक) और आश्विन (शारदीय) नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं, जबकि शेष दो गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं।

दीपावली कितने दिन की होती है?

दीपावली पाँच दिन का पर्व है — धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली), मुख्य दीपावली एवं लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा तथा भाई दूज।

व्रत रखने का क्या उद्देश्य है?

व्रत का अर्थ केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि संकल्प है। इसका उद्देश्य इंद्रियों पर संयम, मन की एकाग्रता और शरीर की शुद्धि है। आयुर्वेद में भी नियमित उपवास को पाचन-तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।