अमावस्या: नया चंद्र, मास और पितृ-स्मरण
अमावस्या कृष्ण पक्ष का समापन और अगले शुक्ल पक्ष की सीमा है। इसका खगोलीय अर्थ, अमांत मास में स्थान और पितृ-स्मरण से जुड़ी परंपराएँ समझकर कैलेंडर की जानकारी तथा अनुष्ठान का निर्णय अलग-अलग पढ़ें।
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दिन की अनुमानित खगोलीय जानकारी को नीचे दिए अर्थ और सीमाओं के साथ पढ़ें।
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मास के क्रम में तिथियों को समझें; अनुष्ठान की तारीख स्थानीय पंचांग से मिलाएँ।
अमावस्या: कृष्ण पक्ष का अंतिम अंतराल
अमावस्या कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि और पूरे चंद्र चक्र की तीसवीं तिथि है।तिथि की 12° परिभाषा से सूर्य और चंद्रमा के भू-केंद्रीय क्रांतिवृत्तीय देशांतरों का अंतर 348° से 360° तक पहुँचने से पहले अमावस्या होता है: 348° ≤ अंतर < 360°। 360° वापस 0° के बराबर है; इस सीमा पर नए चंद्र का खगोलीय क्षण आता है और शुक्ल प्रतिपदा शुरू होती है।
नए चंद्र के आसपास चंद्रमा आकाश में सूर्य की दिशा के पास होता है और उसका प्रकाशमान भाग मुख्यतः पृथ्वी से दूसरी ओर होता है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में उसकी चमकदार चंद्र-चक्राकार सतह दिखाई नहीं देती। यह चंद्रमा के गायब होने का अर्थ नहीं है।पूर्णिमा पर इसके विपरीत पृथ्वी की ओर का भाग लगभग पूरा प्रकाशित दिखता है।
अभी की अमावस्या और अनुष्ठान का दिन
अमावस्या की अवधि आधी रात से बँधी नहीं है। यदि वह सूर्योदय के बाद शुरू हो, तो उस दिन की उदय तिथि चतुर्दशी और बाद के क्षण की तिथि अमावस्या हो सकती है। यदि अमावस्या सूर्योदय के बाद समाप्त हो जाए, तो दैनिक पंचांग अमावस्या और बाद की गणना शुक्ल प्रतिपदा दिखा सकती है।
तिथि की जानकारी
अमावस्या का खगोलीय अंतराल, उसका आरंभ-अंत और सूर्योदय पर उपस्थित तिथि।
परंपरा का निर्णय
पितृ-स्मरण, तर्पण या किसी विशिष्ट पूजा के लिए संबंधित काल में तिथि की उपस्थिति और स्थानीय नियम।
अनेक हिंदू परंपराओं में अमावस्या पितृ-स्मरण, तर्पण, दान या उपासना से जुड़ी है। कौन-सा कर्म करना है और किस दिन या काल में, यह परिवार व परंपरा का विषय है। केवल वर्तमान क्षण का अमावस्या-लेबल किसी श्राद्ध या अन्य अनुष्ठान का समय नहीं बताता। स्थानीय पंचांग के उस अनुष्ठान वाले विवरण और अपनी परंपरा के जानकार से पुष्टि करें।
अमांत मास और अलग कैलेंडरों का अंतर
अमांत पद्धति में चंद्र मास अमावस्या पर समाप्त होता है और शुक्ल प्रतिपदा से नया मास शुरू होता है। पूर्णिमांत पद्धति में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है। दोनों में तिथियों का खगोलीय क्रम वही है, लेकिन कृष्ण पक्ष के मास का नाम अलग मिल सकता है। यह नामकरण का अंतर है; केवल नाम बदलने से अनुष्ठान की नागरिक तारीख बदल जाना आवश्यक नहीं है।
किसी अमावस्या का मास पढ़ते समय कैलेंडर की पद्धति देखें।Drik Panchang की मास-पद्धति सेटिंग इस अंतर को स्पष्ट करती है। एक कैलेंडर का मास-नाम और दूसरे का पक्ष जोड़कर अपने लिए नई तारीख न बनाएँ।
अमावस्या, पहली चंद्रकला और सूर्य ग्रहण
नए चंद्र का क्षण और उसके बाद पहली पतली चंद्रकला का दिखाई देना अलग घटनाएँ हैं। चंद्रकला की दृश्यता में सूर्य से कोणीय दूरी, सूर्यास्त के समय चंद्रमा की ऊँचाई और आकाश की स्थिति भूमिका निभाती हैं। इसलिए चंद्रमा दिखने या न दिखने से अमावस्या की सीमा का सटीक अनुमान नहीं लगाना चाहिए।
हर अमावस्या पर सूर्य ग्रहण नहीं होता। सूर्य ग्रहण नए चंद्र की अवस्था में तभी संभव है जब चंद्रमा का स्थान सूर्य और पृथ्वी के साथ उपयुक्त संरेखण में हो। चंद्र कक्षा के झुकाव के कारण ज्यादातर नए चंद्र में वह सूर्य के ऊपर या नीचे से निकल जाता है।NASA का ग्रहण विवरण इस कारण को समझाता है। कैलेंडर में अमावस्या दिखना ग्रहण या उसकी स्थानीय दृश्यता की घोषणा नहीं है।
अमावस्या खोजने की उपयोगी जाँच-सूची
- सही प्रश्न रखें: अभी की तिथि चाहिए, नए चंद्र का क्षण या किसी अनुष्ठान का दिन? उसी प्रकार का विवरण चुनें।
- मास का क्रम पढ़ें: हिंदू कैलेंडर में कृष्ण चतुर्दशी, अमावस्या और शुक्ल प्रतिपदा का क्रम समझें।
- समय का आधार देखें: पंचांग की अनुमानित जानकारी में क्षण और सूर्योदय का अंतर ध्यान में रखें।
- अनुष्ठान की पुष्टि: अपने नगर, समय-क्षेत्र, मास-पद्धति और अनुष्ठान के नाम वाला विश्वसनीय पंचांग देखें। अन्य नगर की तारीख या समाप्ति समय को सीधे लागू न करें।
अमावस्या: सामान्य प्रश्न
क्या अमावस्या और नया चंद्र बिल्कुल एक ही बात हैं?
अमावस्या कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि का अंतराल है। नया चंद्र सूर्य और चंद्रमा के देशांतर मिलने का खगोलीय क्षण है, जो इस अंतराल की अंतिम सीमा पर आता है। अवधि और क्षण को अलग पढ़ें।
क्या अमावस्या हर बार अंग्रेजी महीने की आखिरी तारीख होती है?
नहीं। अमावस्या चंद्र चक्र से तय होती है, जबकि अंग्रेजी महीना अलग कैलेंडर का भाग है। अमांत चंद्र मास अमावस्या पर समाप्त होता है; यह नियम अंग्रेजी मास पर लागू नहीं होता।
क्या तर्पण का समय केवल सूर्योदय की तिथि से तय करें?
अकेली उदय तिथि से हर अनुष्ठान का निर्णय नहीं होता। तर्पण या अन्य पितृ-कर्म के लिए अपनी परंपरा के काल-विशेष नियम और स्थानीय पंचांग का संबंधित विवरण देखना आवश्यक है। यह मार्गदर्शक अनुष्ठान का समय निर्धारित नहीं करता।
क्या हर अमावस्या पर सूर्य ग्रहण होता है?
नहीं। नए चंद्र के साथ सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी का उपयुक्त संरेखण भी जरूरी है। चंद्र कक्षा के झुकाव के कारण अधिकांश अमावस्याओं पर सूर्य ग्रहण नहीं होता।
स्रोत और आगे की जाँच
खगोलीय परिभाषाओं और पंचांग पढ़ने की पद्धति के लिए ये संदर्भ उपयोगी हैं। अनुष्ठान संबंधी विवरण उस स्रोत की परंपरा के अनुसार पढ़ें। स्रोतों की जाँच: ।
- US Naval Observatory — Calendars, §15.7 — तिथि की 12° वाली परिभाषा और सूर्योदय से दिन की गणना; PDF में भारतीय कैलेंडर का खंड।
- Drik Panchang — अमावस्या का परिचय — कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि और पितृ-स्मरण की परंपरा का संदर्भ; सूची स्थान के अनुसार पढ़ें।
- Drik Panchang — पंचांग के समय कैसे पढ़ें — सूर्योदय पर उपस्थित तिथि, उसके समाप्ति समय और स्थानीय समय की व्याख्या।
- Drik Panchang — अमांत और पूर्णिमांत सेटिंग — चंद्र मास किस तिथि के बाद शुरू होता है और कैलेंडर की पद्धति कैसे चुनें।
- NASA — चंद्रमा की कलाएँ — नए चंद्र से पूर्ण चंद्र तक प्रकाशमान भाग और चंद्र चक्र की खगोलीय व्याख्या।
- NASA — चंद्रमा और ग्रहण — हर पूर्णिमा या अमावस्या पर ग्रहण क्यों नहीं होता।
- Positional Astronomy Centre — राष्ट्रीय पंचांग — भारत मौसम विज्ञान विभाग के केंद्र की राष्ट्रीय पंचांग और Indian Astronomical Ephemeris संबंधी जानकारी।