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तिथि क्या है? चंद्र कैलेंडर पढ़ना सीखें

‘आज कौन-सी तिथि है?’ का उत्तर पढ़ते समय यह जानना जरूरी है कि वह अभी के क्षण की गणना है या सूर्योदय का विवरण। तिथि, पक्ष और समाप्ति समय का अर्थ समझकर पंचांग और मासिक कैलेंडर का उपयोग अधिक स्पष्ट होता है।

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दिन की अनुमानित खगोलीय जानकारी को नीचे दिए अर्थ और सीमाओं के साथ पढ़ें।

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मास के क्रम में तिथियों को समझें; अनुष्ठान की तारीख स्थानीय पंचांग से मिलाएँ।

तिथि का अर्थ: तारीख से अलग एक खगोलीय अंतराल

तिथि सूर्य और चंद्रमा के भू-केंद्रीय क्रांतिवृत्तीय देशांतरों के अंतर से बनती है। चंद्रमा का देशांतर सूर्य से हर अगले 12° आगे बढ़ने पर नई तिथि शुरू होती है। एक चंद्र चक्र के 360° को इस तरह 30 तिथियों में बाँटा जाता है। यह आकाश में दोनों के बीच दिखाई देने वाला सीधा कोण नहीं, उनके देशांतरों का अंतर है।

देशांतर-अंतर = (चंद्र देशांतर − सूर्य देशांतर) को 0° से 360° में रखें

तिथि क्रमांक = देशांतर-अंतर ÷ 12 का पूर्णांक भाग + 1
केवल गणित का उदाहरण: 25° का अंतर तीसरी तिथि, शुक्ल तृतीया, दर्शाता है।

अंग्रेजी तारीख आधी रात को बदलती है। तिथि किसी भी समय बदल सकती है और उसकी अवधि हमेशा 24 घंटे नहीं होती, क्योंकि सूर्य और चंद्रमा की सापेक्ष गति समान नहीं रहती। इसलिए तारीख, सप्ताह का वार और तिथि तीन अलग सूचनाएँ हैं।

शुक्ल और कृष्ण पक्ष की तिथि-सूची

अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में चंद्रमा का दिखने वाला प्रकाशित भाग सामान्यतः बढ़ता है। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में वह घटता है। प्रत्येक पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं। पहले 14 नाम दोनों पक्षों में दोहराते हैं; अंतिम तिथि का नाम अलग है।

पक्ष के भीतर तिथि का क्रम और नाम
क्रमशुक्ल पक्षकृष्ण पक्ष
1प्रतिपदाप्रतिपदा
2द्वितीयाद्वितीया
3तृतीयातृतीया
4चतुर्थीचतुर्थी
5पंचमीपंचमी
6षष्ठीषष्ठी
7सप्तमीसप्तमी
8अष्टमीअष्टमी
9नवमीनवमी
10दशमीदशमी
11एकादशीएकादशी
12द्वादशीद्वादशी
13त्रयोदशीत्रयोदशी
14चतुर्दशीचतुर्दशी
15पूर्णिमाअमावस्या

कुछ गणनाओं में पूरे चक्र को 1–30 तक गिनते हैं: शुक्ल पक्ष 1–15 और कृष्ण पक्ष 16–30। सामान्य पंचांग में कृष्ण प्रतिपदा को फिर से पहली तिथि कहा जाता है। इसलिए “एकादशी” के साथ पक्ष लिखना उपयोगी है: शुक्ल एकादशी और कृष्ण एकादशी अलग अंतराल हैं।

अभी की तिथि और सूर्योदय की उदय तिथि

क्षण की तिथि

जिस समय की गणना हो रही है, उस समय सूर्य-चंद्र देशांतर-अंतर किस 12° खंड में है। दिन में सीमा पार होने पर यह बदल जाती है।

उदय तिथि

चुने हुए स्थान के सूर्योदय पर उपस्थित तिथि। उसी दिन दोपहर या रात की तिथि इससे अलग हो सकती है।

यदि कोई तिथि सूर्योदय के बाद शुरू हो, तो अभी की गणना में वह दिख सकती है, जबकि दिन का सूर्योदय वाला विवरण पिछली तिथि दिखाएगा। यह अपने आप में विरोधाभास नहीं है। एक ही खगोलीय मॉडल में तिथि-परिवर्तन का क्षण साझा होता है; अलग समय-क्षेत्र उसकी घड़ी और तारीख बदलते हैं, जबकि स्थान बदलने से सूर्योदय और उस पर उपस्थित तिथि का चयन बदल सकता है।

उदय तिथि अनेक दैनिक विवरणों का आधार है, लेकिन हर पर्व का निर्णय केवल इसी से नहीं होता। कुछ अनुष्ठान दोपहर, प्रदोष, रात्रि या किसी अन्य निर्धारित काल में तिथि की उपस्थिति देखते हैं। Drik Panchang के समय पढ़ने के निर्देश स्पष्ट करते हैं कि उसके दैनिक पंचांग में लिखा समय सामान्यतः उस अंग का समाप्ति समय होता है।

तिथि का क्षय या वृद्धि कैसे समझें?

एक तिथि दो सूर्योदयों के बीच शुरू होकर समाप्त हो सकती है। तब वह सूर्योदय के आधार पर बने दिन-क्रम में नहीं आती; इसे तिथि का क्षय कहा जाता है। खगोलीय अंतराल फिर भी आया था। दूसरी ओर, एक ही तिथि लगातार दो सूर्योदयों पर उपस्थित हो, तो दिन-क्रम में उसका नाम दोहरता है; इसे वृद्धि कहते हैं।

इसलिए मासिक कैलेंडर में कोई नाम छूटा या दो बार दिखा हो तो पहले गणना का आधार पढ़ें। केवल दो कैलेंडर-खानों को देखकर व्रत-दिन तय करना पर्याप्त नहीं है।

पंचांग पढ़ने का व्यावहारिक क्रम

  1. स्थान और समय: नगर, तारीख और समय-क्षेत्र की पुष्टि करें। विदेश में हों तो भारत का समय अपने शहर का समय न मानें।
  2. गणना का आधार: विवरण अभी के क्षण का है, सूर्योदय का है या किसी चुने समय का, यह देखें।
  3. पूरा नाम: तिथि के साथ पक्ष और मास पढ़ें; अमांत या पूर्णिमांत पद्धति भी देखें।
  4. समाप्ति: तिथि का अंत उसी दिन है या अगली नागरिक तारीख पर, यह जाँचें। “तक” लिखा समय तिथि की शुरुआत नहीं है।
  5. उद्देश्य: पंचांग और मासिक कैलेंडर से क्रम समझें; अनुष्ठान के लिए उसके विशिष्ट नियम वाले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

तिथि: सामान्य प्रश्न

क्या एक तिथि ठीक 24 घंटे की होती है?

नहीं। तिथि सूर्य और चंद्रमा के देशांतर-अंतर में 12° की वृद्धि का अंतराल है। उनकी सापेक्ष गति बदलती है, इसलिए तिथि की अवधि भी बदलती है और उसका आरंभ आधी रात से बँधा नहीं होता।

एक ही तारीख पर दो तिथियाँ क्यों दिखती हैं?

तिथि दिन के बीच में बदल सकती है। सूर्योदय पर पहली तिथि हो और बाद में दूसरी शुरू हो जाए, तो दोनों उस नागरिक तारीख में आती हैं। समाप्ति समय और गणना का आधार पढ़ने से अंतर स्पष्ट होता है।

क्या तिथि का क्षय होने पर वह तिथि आती ही नहीं?

खगोलीय तिथि आती है, लेकिन दो सूर्योदयों के बीच समाप्त हो जाने पर सूर्योदय आधारित दिन-क्रम में उसका नाम नहीं आता। क्षय का अर्थ चंद्र चक्र से उस अंतराल का गायब होना नहीं है।

क्या आज की तिथि से हर व्रत का दिन तय हो सकता है?

नहीं। अभी की तिथि, सूर्योदय पर उपस्थित तिथि और अनुष्ठान के लिए चुना गया दिन अलग बातें हैं। व्रत या पर्व के निर्णय में स्थानीय सूर्योदय और संबंधित परंपरा के अन्य नियम भी आवश्यक हो सकते हैं।

स्रोत और आगे की जाँच

खगोलीय परिभाषाओं और पंचांग पढ़ने की पद्धति के लिए ये संदर्भ उपयोगी हैं। अनुष्ठान संबंधी विवरण उस स्रोत की परंपरा के अनुसार पढ़ें। स्रोतों की जाँच: ।