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एकादशी: तिथि, व्रत-दिन और पारण समझें

एकादशी देखते समय तीन सूचनाएँ अलग पढ़ें: चंद्र तिथि का अंतराल, व्रत की तारीख और व्रत खोलने की अवधि। यह मार्गदर्शक बताता है कि कैलेंडर में एकादशी दिखने से अनुष्ठान का पूरा निर्णय क्यों नहीं हो जाता।

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दिन की अनुमानित खगोलीय जानकारी को नीचे दिए अर्थ और सीमाओं के साथ पढ़ें।

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मास के क्रम में तिथियों को समझें; अनुष्ठान की तारीख स्थानीय पंचांग से मिलाएँ।

एकादशी: प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि

एकादशी चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है। शुक्ल एकादशी में चंद्रमा का देशांतर सूर्य से 120° से 132° के बीच आगे होता है। कृष्ण एकादशी में यही अंतर 300° से 312° के बीच होता है। इन अंतरालों में शुरुआती सीमा शामिल है और अंतिम सीमा पर अगली तिथि शुरू हो जाती है: 120° ≤ अंतर < 132° और 300° ≤ अंतर < 312°। गणना का मूल आधार तिथि की 12° परिभाषा है।

एक चंद्र मास में एक शुक्ल और एक कृष्ण एकादशी होती है। अंग्रेजी मास की लंबाई चंद्र मास से अलग है, इसलिए “हर अंग्रेजी महीने में ठीक दो” को स्थायी नियम न मानें। विष्णु-भक्ति की कई परंपराओं में यह संकल्प, उपासना और संयम का अवसर है। आहार और उपवास की रीति परिवार या संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है।

तिथि शुरू होना और व्रत-दिन तय होना अलग बातें हैं

यदि रात में एकादशी शुरू हुई है, तो उस क्षण की गणना एकादशी दिखा सकती है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि उसी नागरिक तारीख पर सभी को व्रत रखना है। सूर्योदय पर उपस्थित तिथि, पिछले दिन की दशमी से उसका संबंध और संबंधित परंपरा के निर्णय-नियम साथ देखे जाते हैं।

खगोलीय सवाल

एकादशी का अंतराल कब शुरू और समाप्त होता है? अभी उस अंतराल में हैं या नहीं?

अनुष्ठान का सवाल

मेरे नगर और मेरी परंपरा में व्रत किस दिन है, और उसके बाद पारण कब करना है?

स्मार्त और वैष्णव पंचांगों में कुछ स्थितियों में व्रत का दिन अलग हो सकता है। Drik Panchang अपनी एकादशी सूची की पद्धति में इस भेद को बताता है। दोनों सूचियों की तुलना करते समय नगर, पक्ष, मास और परंपरा एक साथ पढ़ें। केवल “एकादशी” नाम मिलना पर्याप्त नहीं है।

पारण क्या है, और तिथि का अंत उसका समय क्यों नहीं है?

पारण व्रत खोलने को कहते हैं। एकादशी का समाप्ति समय केवल द्वादशी के शुरू होने की सीमा बताता है। उसे सीधे भोजन करने का समय मान लेना उचित नहीं है। पारण के निर्णय में अगले दिन का स्थानीय सूर्योदय, द्वादशी की उपलब्ध अवधि और परंपरा के नियम देखे जाते हैं।

Drik Panchang के पारण संबंधी विवरण में हरि वासर को द्वादशी की आरंभिक चौथाई अवधि बताया गया है, जिसमें पारण से बचने का नियम दिया है। यह द्वादशी की अवधि का चौथाई भाग है, घड़ी के स्थिर छह घंटे नहीं। सूर्योदय से पहले द्वादशी समाप्त होने जैसी स्थिति में भी अलग निर्णय की आवश्यकता होती है।

समय की पुष्टि

अनुमानित एकादशी-लेबल से पारण की घड़ी न निकालें। नगर, व्रत-दिन और परंपरा के लिए प्रकाशित पारण-अवधि लें; इस मार्गदर्शक में कोई पारण समय निर्धारित नहीं किया गया है।

व्रत की तारीख खोजते समय यह विवरण साथ रखें

  1. आपका स्थान: जिस नगर में व्रत होगा वही चुनें; यात्रा हो तो दोनों दिनों के स्थान की स्थिति भी स्पष्ट करें।
  2. आपकी परंपरा: स्मार्त, वैष्णव या अपने संप्रदाय का प्रकाशित कैलेंडर चुनें। परिवार की रीति अस्पष्ट हो तो उसी परंपरा के जानकार से पूछें।
  3. तिथि का पूरा विवरण: पक्ष, मास, एकादशी का आरंभ-अंत और व्रत की नागरिक तारीख अलग-अलग पढ़ें।
  4. अगला दिन: पारण की तारीख, स्थानीय समय-क्षेत्र, द्वादशी और प्रकाशित पारण-अवधि की पुष्टि करें।

हिंदू कैलेंडर से चंद्र क्रम और पंचांग से अनुमानित दैनिक स्थिति समझ सकते हैं। ये सुविधाएँ स्थानीय व्रत-निर्णय का विकल्प नहीं हैं। यदि दो स्रोत अलग तारीख दें, तो पहले उनकी स्थान और परंपरा की सेटिंग मिलाएँ; अंतर बचा रहे तो अपने परंपरा-विशेष पंचांग से निर्णय लें।

एकादशी: सामान्य प्रश्न

क्या शुक्ल और कृष्ण एकादशी एक ही तिथि हैं?

दोनों अपने-अपने पक्ष की ग्यारहवीं तिथि हैं, लेकिन चंद्र चक्र के अलग अंतराल हैं। शुक्ल एकादशी पूर्णिमा से पहले और कृष्ण एकादशी अमावस्या से पहले आती है। पंचांग पढ़ते समय पक्ष और मास साथ देखें।

दो पंचांग एकादशी-व्रत की अलग तारीख क्यों बताते हैं?

स्थान, स्थानीय सूर्योदय और स्मार्त या वैष्णव जैसे परंपरा-विशेष नियम अलग होने से व्रत-दिन अलग हो सकता है। पहले दोनों स्रोतों में नगर, समय-क्षेत्र, पक्ष और परंपरा की सेटिंग मिलाएँ।

क्या एकादशी समाप्त होते ही पारण कर सकते हैं?

तिथि का अंत अपने आप पारण का निर्देश नहीं है। स्थानीय सूर्योदय, द्वादशी, हरि वासर और परंपरा के नियम देखकर प्रकाशित पारण-अवधि की पुष्टि करनी होती है। इस साइट की अनुमानित गणना से पारण समय तय नहीं किया जाता।

क्या यहाँ अगली एकादशी की अधिकृत व्रत-तारीख मिलती है?

यह मार्गदर्शक एकादशी और व्रत-निर्णय का अंतर समझाता है। साइट का कैलेंडर अनुमानित खगोलीय जानकारी देता है। अगली एकादशी के व्रत-दिन और पारण के लिए अपने नगर तथा परंपरा का विश्वसनीय पंचांग देखें।

स्रोत और आगे की जाँच

खगोलीय परिभाषाओं और पंचांग पढ़ने की पद्धति के लिए ये संदर्भ उपयोगी हैं। अनुष्ठान संबंधी विवरण उस स्रोत की परंपरा के अनुसार पढ़ें। स्रोतों की जाँच: ।